शुक्रवार, जनवरी 27, 2006

चीन की दीवार में गूगल की ईंट

गूगल कंपनी नियमित रूप से सुर्खियों में रहती है. ज़्यादातर अपनी विशेषताओं के कारण, लेकिन कभी-कभी अपनी कमियों के कारण भी है. इस सप्ताह उसके हिस्से में ज़्यादातर नकारात्मक सुर्खियाँ ही रही हैं.

ऐसा होना ही था, क्योंकि उच्च नैतिक मूल्यों का दम भरने वाली कंपनी चीन सरकार के सामने घुटने टेकते हुए सर्च रिजल्टों की चुनिंदा फ़िल्टरिंग को तैयार हो गई. नैतिकता पर व्यावसायिक मज़बूरियाँ हावी हुईं और शुरूआत हुई चीन केंद्रित गूगल साइट www.google.cn की. इसी के साथ नकारात्मक सुर्खियों में नहाई गूगल ने दुनिया के सबसे तेज़ी से फैलते इंटरनेट बाज़ार में क़दम रख दिया है.

सवाल यह है कि क्या इससे किसी का नुक़सान हुआ है? इसका जवाब देती है नीचे की दो तस्वीरें- पहले में है google.com का सर्च रिजल्ट, और दूसरे में google.cn का. मैंने एक ऐसा सर्च टर्म चुना था जिससे चीन सरकार को मिर्ची लगती है यानि Falun Gong. जैसा कि हम जानते हैं फ़ालुन गोंग योग जैसे व्यायाम को बढ़ावा देने वाला एक संप्रदाय है जिसे चीन ने प्रतिबंधित कर रखा है.



एक ही सर्च टर्म के लिए जहाँ google.com ने 27.6 लाख परिणाम दिए, वहीं google.cn ने बहुत-बहुत कम यानि मात्र 12,300. इतना ही नहीं सर्च की क़्वालिटी में भी भारी अंतर है- google.com ने जहाँ फ़ालुन गोंग समर्थकों के पृष्ठों को ऊँची रैंकिंग दी है, वहीं google.cn में हर पेज पर इस अहिंसक संप्रदाय के विरोधी ही विरोधी नज़र आते हैं.

तो क्या 'बुरा मत बनो' और 'सबके लिए उपयोगी सूचना' जैसे सूत्र वाक्यों का सहारा लेने वाली गूगल ने माइक्रोसॉफ़्ट और याहू जैसी मुनाफ़ाखोर कंपनियों की पंक्ति में रहना स्वीकार कर लिया है? मेरे ख़्याल से अभी इसका दोटूक जवाब देने का वक़्त नहीं आया है. कोई शक नहीं कि स्वतंत्र इंटरनेट का पर्याय बनी गूगल के पाँव डगमगाए हैं. लेकिन जब तक गूगल के नैतिकता भरे नारों के बिल्कुल बेमानी हो जाने और मुनाफ़ाखोरी उसका एकमात्र लक्ष्य होने की बात बिल्कुल स्पष्ट नहीं हो जाती है उसे संदेह का लाभ मिलना चाहिए.

1 टिप्पणी:

कुमार शिव ने कहा…

गूगल की पोल खोलने के लिये धन्यवाद.चीन में पैर जमाने का लालच किसी भी अन्य आदर्श से बडा है. चीन को यह क्रेडिट तो देना ही होगा कि वह अपनी शर्तों पर ही किसी को अपने देश में पैर तो दूर उंगली टिकाने देता है.