मंगलवार, दिसंबर 06, 2005

कहानी एक ग्लोबल टूथब्रश की

ग्लोबलाइज़ेशन या भूमंडलीकरण की बात होती है तो सबसे अच्छा उदाहरण होता है चीनी उत्पादों का. भारत में पिछले कुछ वर्षों से जो उदाहरण सबसे ज़्यादा पेश किया जाता रहा है वो यह कि कैसे होली के दौरान उत्तर भारत के कस्बाई बाज़ार चीन में बनी पिचकारियों से पटे पड़े होते हैं, जबकि चीन में होली जैसा कोई त्योहार है भी नहीं. लेकिन हम यहाँ चर्चा करते हैं एक टूथब्रश की.

जर्मनी की प्रतिष्ठित पत्रिका डेअर श्पीगल (द मिरर या दर्पण) ने ग्लोबलाइज़ेशन पर अपना विशेषांक निकाला है. इसने श्रम के विश्वव्यापी वितरण को उजागर करने के लिए एक 'ग्लोबल टूथब्रश' का उदाहरण लिया है.

नीदरलैंड्स की कंपनी फ़िलिप्स निर्मित इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रशों में सबसे अच्छे माने जाते हैं सोनीकेयर इलीट सिरीज़ के टूथब्रश- मसलन इलीट 7000, इलीट 7300 और इलीट 7500. इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश के बाज़ार के 8 प्रतिशत हिस्से पर इनका क़ब्ज़ा है, यानि दो करोड़ लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं.

फ़िलिप्स के सोनीकेयर इलीट टूथब्रश की औसत क़ीमत होती है क़रीब 160 डॉलर. ज़ाहिर है फ़िलिप्स को इसकी बिक्री से बढ़िया मुनाफ़ा होता है. मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए ज़रूरी है बिक्री बढ़ाना. और बिक्री बढ़ाने के लिए आकर्षक प्रचार के अतिरिक्त ज़रूरी होता है क़ीमत को नियंत्रित रखना. ऐसी स्थिति में सामने आता है ग्लोबलाइज़ेशन या भूमंडलीकरण. गुणवत्ता बनाए रखते हुए क़ीमत पर नियंत्रण की गुंज़ाइश हो तो फ़िलिप्स जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी दुनिया के किसी भी कोने में अपने कारखाने लगा सकती है या फिर अपना काम आउटसोर्स कर सकती है.

सोनीकेयर इलीट टूथब्रश के निर्माण की प्रक्रिया में 10 देशों में 4,500 लोगों को रोज़गार मिला हुआ है. किसी सुपर मार्केट में पहुँचने से पहले लगभग 160 ग्राम वज़न वाला एक टूथब्रश टुकड़ों-टुकड़ों में 28,000 किलोमीटर की यात्रा कर चुका होता है, यानि धरती की परिधि का क़रीब दो तिहाई हिस्सा.

छोटे से सोनीकेयर इलीट टूथब्रश कुल 38 हिस्सों से मिलकर बनता है. आइए देखें कहाँ से क्या आता है, कहाँ क्या होता है-

चीन(शेनझ़ेन)- तांबे के तार
जापान(टोक्यो)- निकेल-कैडमियम सेल
फ़्रांस(रैम्बोइले)- सेल चार्जिंग वाले हिस्से
चीन(झुहाई)- सर्किट-बोर्ड का ख़ाका तैयार करने का काम
ताइवान(ताइपे के पास)- निकेल-कैडमियम सेल और सर्किट-बोर्ड के उपकरण
मलेशिया(कुआलालंपुर)- सर्किट-बोर्ड के हिस्से
फिलिपींस(मनीला)- सर्किट-बोर्ड पर लगे 49 ट्रांजिस्टर और रेज़िस्टर की जाँच
स्वीडन(सैंडविकेन)- टूथब्रश की बॉडी में इस्तेमाल विशेष स्टील
ऑस्ट्रिया(क्लागेनफ़ुर्ट)- विशेष स्टील को उपयुक्त आकार में काटने का काम और प्लास्टिक के हिस्सों का निर्माण
अमरीका(स्नोक़ाल्मी)- प्लास्टिक के हिस्सों को जोड़ने का काम
अमरीका(सिएटल)- पैकेजिंग का काम

ये तो हुई अभी की स्थिति. फ़िलिप्स को अच्छी तरह पता है कि उसके सोनीकेयर इलीट उत्पादों को ब्राउन के 3डी एक्सेल उत्पादों से प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है. उसकी नज़र 30 करोड़ उपभोक्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश बाज़ार के पाँच से दस वर्षों के भीतर तीन-गुना फैलने की भविष्यवाणी पर पहले से ही टिकी है. मतलब अपने टूथब्रश की क़ीमत नियंत्रित रखने और ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहकों को पकड़ने के लिए डच बहुराष्ट्रीय कंपनी भूमंडलीकरण की प्रक्रिया को और गहराई से आत्मसात करने के लिए तैयार ही बैठी है, विवश है.

3 टिप्‍पणियां:

Vijay Thakur ने कहा…

बहुत बढिया जानकारी जुटाई है आपने, इतनी छोटी सी चीज का दुनिया के इतने सारे हिस्सों से बनकर आना मेरे लिए बिल्कुल नयी जानकारी है। ज्ञानवर्धन के लिए धन्यवाद्।

Raviratlami ने कहा…

फ़िलिप्स का तो नहीं, पर ब्राउन का ऐसा ही टूथ ब्रश 500 रुपए में भारत में मिल रहा है. क्या किसी ने इसका इस्तेमाल किया है और क्या यह मुख शुद्धि के लिए कारगर है?

Hindi Blogger ने कहा…

इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश आम टूथब्रश से बेहतर सफाई ज़रूर करता है क्योंकि यह प्रति सेकेंड कई बार चक्कर(हाफ़-स्पिन यानि बारी-बारी से क्लॉकवाइज़-एंटीक्लॉकवाइज़) लगाता है.

लेकिन इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश लें तो बेहतर क़्वालिटी का ही- मतलब उसकी दो या ढाई मिनट में ख़ुद रुकने की प्रोग्रामिंग हो, दाँतों पर ज़्यादा दबाव पड़ने पर उसकी घर्रर्रर्र.. की आवाज़ में परिवर्तन साफ पता चले ताकि अनजाने में दाँतों को नुक़सान की आशंका न हो. टूथब्रश में दो स्पीड की व्यवस्था हो ताकि रोज़ाना एकाधिक बार इस्तेमाल की दशा में हमेशा टॉप स्पीड इस्तेमाल की बाध्यता न रहे.