मंगलवार, फ़रवरी 13, 2007

काव्य महिमा-2

ग्रीनिचमैरियन मूर ने 1935 की 'पोएट्री' नामक रचना में कविता के बारे में कहा है- "मैं भी इसे नापसंद करती हूँ. और भी कई चीज़ें हैं जो इससे कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं." ...लेकिन इसी कृति में आगे वह कविता के जादू का बयान इन शब्दों में करती हैं- "हालाँकि, पूर्ण निरादर के साथ इसे पढ़ कर, आख़िरकार आप इसमें पाते हैं, एक धरातल यथार्थ का."

...एमिलि डिकिन्सन को कविता मे बेशुमार संभावनाएँ नज़र आती हैं--गद्य से कहीं ज़्यादा. इसी तरह चेस्लाफ़ मियोस का मानना है कि कविता ही वो चीज़ है जिसके सहारे हमें शून्यता से लड़ाई करनी है. उनके अनुसार कविता जीवन के बारे में, और जीवन के लिए है.

...कविताएँ कठिन नहीं होतीं? उतनी तो नहीं ही, हम जितने कठिन हैं. हमारी जटिल ज़िंदगी अधिकांश कविताओं के मुक़ाबले काफ़ी कठिन है. हम अपने लिए तो कठिन हैं ही, दूसरों के लिए भी आसान नहीं. कविताएँ सरलीकरण से बचती हैं. अच्छी कविताएँ कभी-कभार ही दोटूक बातें करती हैं. दरअसल, वे चाहती हैं कि अपने बारे में आपकी क्या सोच है, ये ख़ुद आप तलाश करें.

क्या कविताएँ ग़ैरजिम्मेदार नहीं हैं? सोलोन के अनुसार कवि जम कर झूठ परोसते हैं. लेकिन पिकासो की मानें तो कला एक झूठ है जो हमें सत्य का अनुभव कराती है. दरअसल, कविता की सच्चाइयाँ अंतर्मुखी होती हैं. वे भावनाओं की, कल्पनाओं की सच्चाइयाँ होती हैं. और, कविता की ज़िम्मेदारियाँ भी अंतर्मुखी होती हैं. कवि को अपनी संवेदनाओं के प्रति वफ़ादार रहना चाहिए. बनावटी भावों को व्यक्त करना कल्पनाशीलता के ख़िलाफ़ पाप है.

कविताएँ पढ़ने के बारे में भी सच बिल्कुल यही है. सच्चाई और ज़िम्मेदारी से कविताएँ पढ़ना आपके अंतर्मन को मज़बूती देता है. कविता एकाग्रचितता की कला है, न सिर्फ़ कवियों के लिए, बल्कि पाठकों के दृष्टिकोण से भी. कविताएँ उन बातों पर आपका ध्यान लगाती हैं, जो कि आपके अंतर्मन के अनुरूप हैं.

कॉलरिज ने पाठकों को चार वर्गों में बाँटा है: सबसे अच्छा वर्ग कोहिनूरों का, जो पढ़ कर ख़ुद लाभान्वित होते हैं और दूसरों को भी लाभान्वित करते हैं; दूसरा वर्ग रेत-घड़ियों का, जो पढ़ा हुआ याद नहीं रखते, पढ़ कर सिर्फ़ समय गुजारते हैं; तीसरा वर्ग छलनी का, जिन्हें पढ़े हुए में से छना हुआ कचरा भर याद रह जाता है; और चौथा वर्ग है स्पंज का, जो पढ़ा हुआ सब कुछ वापस कर देते हैं, लेकिन थोड़ी गंदगी के साथ.

लेकिन, हमलोगों में से सभी पाठकों के रूप में विकसित हो सकते हैं. जैसा कि इलियट ने कहा है- कविता क्या है, हम उसे पढ़ कर ही जान पाते हैं. पढ़ना शुरू करके ही आप अपना पढ़ाकू तंत्र विकसित कर सकते हैं, अपनी क्षमता का विस्तार कर सकते हैं...तब तक, जब तक कि पढ़ी जा रही कविताएँ आपको अपनी ख़ुद की सृजनात्मकता से नहीं जोड़ दे.

पढ़ने की क्रिया रचनात्मक प्रक्रिया में सहायक होती है. यदि आप एक अच्छी कविता के सामने अपनी पूरी असलियत में प्रस्तुत हों, तो वह आपके और दुनिया के बारे में आपकी समझ को विस्तार प्रदान कर सकेगी. ऐसे काल में जबकि शरीर, बाज़ार, उपभोग को लेकर आसक्ति इतनी ज़्यादा है, छह पंक्तियों की एक शाब्दिक रचना आपको अपनी ज़िंदगी देखने का अवसर दे सकती है, नया अनुभव प्रदान कर सकती है.

कविता यथार्थ का जो धरातल मुहैय्या कराती है, वो ख़ुद आप में है.

(ब्रितानी साहित्यकार रुथ पैडेल के लेख Turn Over a New Leaf का सार)

2 टिप्‍पणियां:

आशीष विद्यार्थी ने कहा…

कविता पर आपके लेख अद्भुत हैं. आपको साधुवाद.

rachana ने कहा…

शुक्रिया! कविता पर दोनो लेखों के लिये..कविता पर इतने स्पष्ट दृष्टिकोण पहले नही पढे थे मैने.