गुरुवार, जनवरी 31, 2008

चाँद छूने के बाद

चाँद पर आर्मस्ट्राँगधरती से इतर किसी ज़मीन पर पाँव रखने का मौक़ा सिर्फ़ 12 लोगों को ही मिला है. इन लोगों ने अमरीका के अपोलो अभियान की विभिन्न उड़ानों के सहारे चाँद पर जाकर ये उपलब्धि अर्जित की.

इन्होंने जुलाई 1969 से दिसंबर 1972 के बीच 'मूनवॉकिंग' की. उसके बाद इनकी ज़िंदगी ने क्या रुख़ किया? मुझे इस सवाल का जवाब हाल ही में एक लेख में मिला. आश्चर्य हुआ कि इनमें से ज़्यादातर ने बाद में वैज्ञानिक कार्यों से मुँह मोड़ लिया.

आइए क्रमवार देखते हैं कि चाँद को छूने वाले दर्जन भर लोगों का बाद का जीवन कैसा रहा-

1. नील आर्मस्ट्राँग, यान- अपोलो 11 (चाँद पर उतरने की तारीख़- 21 जुलाई 1969)
चाँद पर सबसे पहले क़दम रखने वाले आर्मस्ट्राँग बारह मूनवॉकर्स में सबसे रहस्मय माने जाते हैं. नायक वाली छवि उन्हें कभी रास नहीं आई. उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर उपस्थिति, इंटरव्यू, विज्ञापन आदि से अपने को अलग रखा. वे 1971 में सेवानिवृति तक नासा से जुड़े रहे. इस समय वे अपनी पत्नी के साथ अमरीका के ओहायो में रहते हैं. अभी भी वे ऑटोग्राफ़ देने से मना कर देते हैं.

2. बज़ एल्ड्रिन, अपोलो 11 (21 जुलाई 1969)
चाँद से लौटने के बाद बज़ को बुरे वक़्त ने घेर लिया. अपोलो 11 अभियान में उनके सहयोगी माइक कॉलिन की मानें तो बज़ को शुरू से ही इस बात का मलाल रहा कि वे चाँद पर क़दम रखने वाला पहला नहीं, बल्कि दूसरा मानव बने. शीघ्र ही बज़ शराब में गोते लगाने लगे, उन्हें अवसाद ने घेर लिया. उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ दी. एक-एक कर दो पत्नियों से तलाक हुआ. तीसरी शादी के बाद ही वे 1988 में फिर से सामान्य ज़िंदगी की ओर लौटते दिखे. बाद में उन्होंने एक लेखक के रूप में पहचान बनाई. बज़ अंतरिक्ष-पर्यटन के बड़े समर्थकों में से हैं.

3. चार्ल्स पीट कोनरैड (अपोलो 12, 19 नवंबर 1969)
करिश्माई व्यक्तित्व वाले कोनरैड ने 1974 में नासा को छोड़ कर प्राइवेट सेक्टर का रुख़ किया. उन्होंने मैकडोनेल-डगलस की व्यावसायिक अंतरिक्ष यात्रा परियोजना में योगदान दिया. अपोलो 12 के इस कमांडर की मौत 1999 में मोटरसाइकिल दुर्घटना में हुई.

4. एलन बीन, अपोलो 12 (19 नवंबर 1969)
अपोलो 12 अभियान की सफलता के 12 साल बाद तक बीन नासा से जुड़े रहे. वहाँ से 1981 में सेवानिवृति के बाद उन्होंने चित्रकारी का पेशा चुना. उनके चित्र मुख्यत: चाँद और अन्य अंतरिक्षीय विषयों पर आधारित होते हैं.

5. एलन शेपर्ड, अपोलो 14 (5 फ़रवरी 1971)
शेपर्ड मई 1961 में अंतरिक्ष में पहुँचने वाले पहले अमरीकी बने थे. क़रीब दस साल बाद उन्हें चाँद पर क़दम रखने वाला पाँचवाँ व्यक्ति बनने का सौभाग्य मिला. सैनिक पृष्ठभूमि वाले शेपर्ड को बड़ा ही कड़क यान-कप्तान माना जाता था. लेकिन जब उन्होंने चाँद पर क़दम रखा तो अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और रो पड़े. चंद्रयात्रा के बाद उनका व्यक्तित्व बिल्कुल बदल गया. वे शांत प्रकृति के इंसान बन गए. नासा से 1974 में सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने निजी क्षेत्र में काम किया. वे 1998 में ल्यूकीमिया का शिकार होकर इस दुनिया से विदा हुए.

6. एडगर मिशेल, अपोलो 14 (5 फ़रवरी 1971)
मिशेल ने ही कहा था कि चाँद से धरती को देखने पर सार्वभौम-जुड़ाव का अहसास होता है. चंद्रयात्रा के तुरंत बाद उन्होंने नासा को छोड़ दिया. उन्होंने 1973 में Institute of Noetic Sciences की स्थापना की जहाँ आध्यात्मिक ऊर्जा, वैकल्पिक चिकित्सा और परामानसिक क्षमता जैसे विषयों पर अनुसंधान होता है. मिशेल ने 2004 में दावा किया कि वैंकूवर के एक किशोर ने हज़ारों मील दूर रहते हुए उनका कैंसर ठीक कर दिया. उन्होंने अमरीकी सरकार से पराग्रहीय जीवों के बारे में सच्चाई सार्वजनिक करने की माँग की है. मिशेल का मानना है कि दूसरे ग्रहों के जीव दशकों से धरती पर आते रहे हैं.

7. डेविड स्कॉट, अपोलो 15 (30 जुलाई 1971)
डाक-टिकट घोटाले में शामिल होने के आरोपों में अमरीकी सरकार ने स्कॉट को दोबारा अंतरिक्ष में भेजे जाने पर रोक लगा दी थी. उन पर आरोप था कि वे अपने साथ विशेष अवसर पर जारी किए जाने वाले 398 डाक-टिकट साथ ले गए थे. कथित तौर पर उनकी एक जर्मन व्यवसायी से सांठगांठ थी जिसने भारी क़ीमत पर उनमें से सौ डाक-टिकट ख़रीदने का वादा किया था. 1975 में नासा से रिटायर होने के बाद वे सार्वजनिक मंच से ग़ायब ही हो गए. वापस 2003 में वो तब चर्चा में आए, जब समाचार-वाचिका एना फ़ोर्ड ने उनसे अपनी सगाई की ख़बर दी. हालाँकि ये संबंध ज़्यादा दिन नहीं चल पाया. स्कॉट इन दिनों 'मोटिवेशनल स्पीकर' का काम करते हैं.

...अगली पोस्ट में जारी...

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. राम चन्द्र मिश्र ने कहा…

अभी तक चाँद पर मानव नहीं पहुँचा है। कम से कम ५ सल और लगेंगे ऐसी तकनीक विकसित करने में।

Gyandutt Pandey ने कहा…

यह नहीं मालुम था कि एल्ड्रिन को पहला मानव न होने के कारण अवसाद हो गया था। यह भी अच्छा लगा कि वे अवसाद से उबर पाये।
यह लेख मुझे महत्वपूर्ण जानकारी दे गया। धन्यवाद।