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शुक्रवार, फ़रवरी 01, 2008

चाँद छूने के बाद (भाग-2)

चंद्रोदयइस लेख के पहले हिस्से में हमने चाँद पर क़दम रखने वाले लोगों में से सात के बारे में पढ़ा. आइए बाक़ी के पाँच मूनवॉकर के बारे में जानते हैं कि धरती से इतर किसी ज़मीन पर क़दम रखने की उपलब्धि हासिल करने के बाद उनकी ज़िंदगी कैसी रही-

8. जेम्स इरविन, अपोलो 15 (30 जुलाई 1971)
इरविन की मानें तो चाँद पर क़दम रखने के साथ ही उनका ईश्वर से साक्षात्कार हुआ था. भगवान से इस मुलाक़ात ने उनकी ज़िंदगी को बदल कर रख दिया. धरती पर वापस लौटते ही उन्होंने नासा छोड़ दिया. वे न सिर्फ़ धर्म की शरण में आ गए, बल्कि High Flight Foundation नामक एक संगठन की स्थापना भी की जो कि ईसाइयत की विभिन्न शाखाओं को साथ लेकर चलती है. इस संगठन का नेतृत्व करते हुए वो चार बार मिशन लेकर तुर्की गए Noah's Ark की खोज करने. यानि उस नौका के अवशेष ढूंढने जो कि मिथकों के अनुसार महाप्रलय के दौरान ईश्वरीय निर्देश पर तत्कालीन दुनिया के एकमात्र सदचरित्र व्यक्ति नोह और उसके परिवार तथा प्रमुख जीव प्रजातियों को बचाने के लिए बना था. इरविन को इस मिथकीय नौका को ढूँढ निकालने के अपने प्रयास में हर बार नाकामी ही मिली. इरविन का 1991 में निधन हुआ.

9. जॉन डब्ल्यू यंग, अपोलो 16 (21 अप्रैल 1972)
यंग छह बार अंतरिक्ष यात्राएँ करने वाले पहले व्यक्ति बने. ये रिकॉर्ड अभी भी उनके नाम है. चंद्रयात्रा के बाद 32 साल तक वे नासा के साथ रहे और 74 साल की उम्र में 2004 में सेवानिवृति ली. अत्यंत प्रतिभावान यंग ने नासा के 50 वर्षों के इतिहास में लगभग सभी प्रमुख परियोजनाओं में अपना योगदान दिया. उनके साथी अंतरिक्षयात्रियों की मानें तो यंग विनम्रता की प्रतिमूर्ति हैं.

10. चार्ल्स ड्यूक, अपोलो 16 (21 अप्रैल 1972)
ड्यूक को चाँद पर जा कर इतनी ख़ुशी हुई कि उन्हें वहाँ हेलमेट उतारने की इच्छा पर काबू करने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी. चंद्रयात्रा के बाद वे बोरियत का शिकार हो गए. उन्होंने नासा को छोड़ दिया और ढेर सारा पैसा बनाने का फ़ैसला किया. उन्होंने बीयर के धंधे में ख़ूब पैसा बनाया भी. लेकिन बोरियत एक बार फिर उन पर हावी हो गई, और वे दिन-रात बीयर में डूबे रहने लगे. उनकी पत्नी डॉटि को भी ड्यूक पर चंद्र की कुदृष्टि पड़ने का अहसास हुआ. उन्होंने चंद्रयात्रा के बाद ड्यूक के ग़ुस्सैल हो जाने और परिवार से दूर काम में ही मशगूल रहने की शिकायत की. इन सबके बीच डॉटि भी नशाखोरी में डूब गई. लेकिन बाद में वह ईश्वर की शरण में आ गई. इसके बाद ड्यूक ने भी बीयर का धंधा छोड़ धर्म की राह पकड़ ली. इस तरह अंतत: पति-पत्नी चंद्रमा के अभिशाप से मुक्त हुए. अब दोनों ईसाइयत का प्रचार करते हैं, लोगों को सदकर्म के लिए प्रेरित करते हैं.

11. यूजिन कर्नेन, अपोलो 17 (11 दिसंबर 1972)कर्नेन
कर्नेन चंद्रमा पर उतरने वाले ग्यारहवें लेकिन चंद्र सतह पर चलने वाले अंतिम व्यक्ति हैं. दरअसल वापसी के दौरान वे बारहवें मूनवॉकर श्मिट के बाद अपोलो चंद्र मॉड्यूल में वापस लौटे थे. कर्नेन 1975 में प्राइवेट सेक्टर में आ गए, लेकिन नासा की परियोजनाओं में योगदान देते रहे. कर्नेन मानव अंतरिक्ष मिशन के बड़े पैरोकारों में से हैं. वर्षों से वे चाँद पर दोबारा मानव मिशन भेजे जाने के साथ-साथ मंगल ग्रह पर भी मनुष्य को पहुँचाने के लिए जनमत बनाने का प्रयास करते रहे हैं.

12. हैरिसन जैक श्मिट, अपोलो 17 (11 दिसंबर 1972)
चाँद पर उतरने वाले बारहवें व्यक्ति और एकमात्र वैज्ञानिक श्मिट 1975 में नासा को छोड़ कर राजनीति में आ गए. वे 1977 में अमरीकी सीनेट के लिए चुने गए. लेकिन अगले कार्यकाल के लिए नहीं चुने जाने पर 1982 में उन्होंने राजनीति को नमस्कार कह दिया. अब उनका समय हीलियम-3 पर रिसर्च में बीतता है. माना जाता है कि चाँद पर बहुतायत में उपलब्ध हीलियम-3 भविष्य में ऊर्जा का स्वच्छ स्रोत साबित हो सकता है.

गुरुवार, जनवरी 31, 2008

चाँद छूने के बाद

चाँद पर आर्मस्ट्राँगधरती से इतर किसी ज़मीन पर पाँव रखने का मौक़ा सिर्फ़ 12 लोगों को ही मिला है. इन लोगों ने अमरीका के अपोलो अभियान की विभिन्न उड़ानों के सहारे चाँद पर जाकर ये उपलब्धि अर्जित की.

इन्होंने जुलाई 1969 से दिसंबर 1972 के बीच 'मूनवॉकिंग' की. उसके बाद इनकी ज़िंदगी ने क्या रुख़ किया? मुझे इस सवाल का जवाब हाल ही में एक लेख में मिला. आश्चर्य हुआ कि इनमें से ज़्यादातर ने बाद में वैज्ञानिक कार्यों से मुँह मोड़ लिया.

आइए क्रमवार देखते हैं कि चाँद को छूने वाले दर्जन भर लोगों का बाद का जीवन कैसा रहा-

1. नील आर्मस्ट्राँग, यान- अपोलो 11 (चाँद पर उतरने की तारीख़- 21 जुलाई 1969)
चाँद पर सबसे पहले क़दम रखने वाले आर्मस्ट्राँग बारह मूनवॉकर्स में सबसे रहस्मय माने जाते हैं. नायक वाली छवि उन्हें कभी रास नहीं आई. उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर उपस्थिति, इंटरव्यू, विज्ञापन आदि से अपने को अलग रखा. वे 1971 में सेवानिवृति तक नासा से जुड़े रहे. इस समय वे अपनी पत्नी के साथ अमरीका के ओहायो में रहते हैं. अभी भी वे ऑटोग्राफ़ देने से मना कर देते हैं.

2. बज़ एल्ड्रिन, अपोलो 11 (21 जुलाई 1969)
चाँद से लौटने के बाद बज़ को बुरे वक़्त ने घेर लिया. अपोलो 11 अभियान में उनके सहयोगी माइक कॉलिन की मानें तो बज़ को शुरू से ही इस बात का मलाल रहा कि वे चाँद पर क़दम रखने वाला पहला नहीं, बल्कि दूसरा मानव बने. शीघ्र ही बज़ शराब में गोते लगाने लगे, उन्हें अवसाद ने घेर लिया. उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ दी. एक-एक कर दो पत्नियों से तलाक हुआ. तीसरी शादी के बाद ही वे 1988 में फिर से सामान्य ज़िंदगी की ओर लौटते दिखे. बाद में उन्होंने एक लेखक के रूप में पहचान बनाई. बज़ अंतरिक्ष-पर्यटन के बड़े समर्थकों में से हैं.

3. चार्ल्स पीट कोनरैड (अपोलो 12, 19 नवंबर 1969)
करिश्माई व्यक्तित्व वाले कोनरैड ने 1974 में नासा को छोड़ कर प्राइवेट सेक्टर का रुख़ किया. उन्होंने मैकडोनेल-डगलस की व्यावसायिक अंतरिक्ष यात्रा परियोजना में योगदान दिया. अपोलो 12 के इस कमांडर की मौत 1999 में मोटरसाइकिल दुर्घटना में हुई.

4. एलन बीन, अपोलो 12 (19 नवंबर 1969)
अपोलो 12 अभियान की सफलता के 12 साल बाद तक बीन नासा से जुड़े रहे. वहाँ से 1981 में सेवानिवृति के बाद उन्होंने चित्रकारी का पेशा चुना. उनके चित्र मुख्यत: चाँद और अन्य अंतरिक्षीय विषयों पर आधारित होते हैं.

5. एलन शेपर्ड, अपोलो 14 (5 फ़रवरी 1971)
शेपर्ड मई 1961 में अंतरिक्ष में पहुँचने वाले पहले अमरीकी बने थे. क़रीब दस साल बाद उन्हें चाँद पर क़दम रखने वाला पाँचवाँ व्यक्ति बनने का सौभाग्य मिला. सैनिक पृष्ठभूमि वाले शेपर्ड को बड़ा ही कड़क यान-कप्तान माना जाता था. लेकिन जब उन्होंने चाँद पर क़दम रखा तो अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और रो पड़े. चंद्रयात्रा के बाद उनका व्यक्तित्व बिल्कुल बदल गया. वे शांत प्रकृति के इंसान बन गए. नासा से 1974 में सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने निजी क्षेत्र में काम किया. वे 1998 में ल्यूकीमिया का शिकार होकर इस दुनिया से विदा हुए.

6. एडगर मिशेल, अपोलो 14 (5 फ़रवरी 1971)
मिशेल ने ही कहा था कि चाँद से धरती को देखने पर सार्वभौम-जुड़ाव का अहसास होता है. चंद्रयात्रा के तुरंत बाद उन्होंने नासा को छोड़ दिया. उन्होंने 1973 में Institute of Noetic Sciences की स्थापना की जहाँ आध्यात्मिक ऊर्जा, वैकल्पिक चिकित्सा और परामानसिक क्षमता जैसे विषयों पर अनुसंधान होता है. मिशेल ने 2004 में दावा किया कि वैंकूवर के एक किशोर ने हज़ारों मील दूर रहते हुए उनका कैंसर ठीक कर दिया. उन्होंने अमरीकी सरकार से पराग्रहीय जीवों के बारे में सच्चाई सार्वजनिक करने की माँग की है. मिशेल का मानना है कि दूसरे ग्रहों के जीव दशकों से धरती पर आते रहे हैं.

7. डेविड स्कॉट, अपोलो 15 (30 जुलाई 1971)
डाक-टिकट घोटाले में शामिल होने के आरोपों में अमरीकी सरकार ने स्कॉट को दोबारा अंतरिक्ष में भेजे जाने पर रोक लगा दी थी. उन पर आरोप था कि वे अपने साथ विशेष अवसर पर जारी किए जाने वाले 398 डाक-टिकट साथ ले गए थे. कथित तौर पर उनकी एक जर्मन व्यवसायी से सांठगांठ थी जिसने भारी क़ीमत पर उनमें से सौ डाक-टिकट ख़रीदने का वादा किया था. 1975 में नासा से रिटायर होने के बाद वे सार्वजनिक मंच से ग़ायब ही हो गए. वापस 2003 में वो तब चर्चा में आए, जब समाचार-वाचिका एना फ़ोर्ड ने उनसे अपनी सगाई की ख़बर दी. हालाँकि ये संबंध ज़्यादा दिन नहीं चल पाया. स्कॉट इन दिनों 'मोटिवेशनल स्पीकर' का काम करते हैं.

...अगली पोस्ट में जारी...